यह छोटी सी व्याख्या है, मन से निकली कविता बनकर, पर व्यक्तित्व तुम्हारा है सागर, नहीं रख सकते पात्... यह छोटी सी व्याख्या है, मन से निकली कविता बनकर, पर व्यक्तित्व तुम्हारा है सागर...
फिर अधिकतर शिल्प आगे बढ़ जाता है, लेकिन शिल्पकार नेपथ्य में रह जाता है। फिर अधिकतर शिल्प आगे बढ़ जाता है, लेकिन शिल्पकार नेपथ्य में रह जाता है।
लक्ष्मी जी का दुलारा, फिर भी कितना निर्मल इतना कोमल कितना प्यारा। लक्ष्मी जी का दुलारा, फिर भी कितना निर्मल इतना कोमल कितना प्यारा।
हरसिंगार रात की रानी सुगंध बिखराते हैं मस्तानी मन में हलचल मचती फिर रोज देखते चाँद हरसिंगार रात की रानी सुगंध बिखराते हैं मस्तानी मन में हलचल मचती फिर र...
पल भर में भुला देता है गहन पीड़ा को चाहता रहे नित विविध क्रीड़ा को । पल भर में भुला देता है गहन पीड़ा को चाहता रहे नित विविध क्रीड़ा को ।
ज्यादातर लोग सादगी मुड़कर देखते नहीं पर अद्भुत को अक्सर रुक कर सुनते हैं .... सुनते हैं ... जब ये ... ज्यादातर लोग सादगी मुड़कर देखते नहीं पर अद्भुत को अक्सर रुक कर सुनते हैं .... स...